मिगुएल कार्लोस गुटीएरेज

ऐतिहासिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण सेमाता परमेश्वर के अस्तित्व की सच्चाई

आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक स्थिरता सामाजिक विकास को
सामने लाती हैं। ये सब चीजें मूल रूप से माता से आती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय बाइबल सेमिनार, दक्षिण अमेरिका - डबल्यू एम सी प्रधान कार्यालय का अंतर्राष्ट्रीय सभाकक्ष

मिगुएल कार्लोस गुटीएरेज

पेरू

पेरू के उआछो में
सांछेस कारिओन विश्वविद्यालय के
इतिहास विभाग का प्रोफेसर

संसार में बहुत सी प्राचीन सभ्यताओं ने विश्वास किया कि माता से प्रकृति और जीवन की शुरुआत हुई और उसे एक देवी माना। ऐतिहासिक और सामाजिक शोध के अनुसार, उन्होंने माता के द्वारा मानसिक स्थिरता की तलाश की। हम सब माता को ढूंढ़ने की एक सहज वृत्ति के साथ पैदा होते हैं। हमें माता के द्वारा प्रदान किए जाने वाले शारीरिक और आत्मिक भोजन की आवश्यकता है।

प्राचीन सभ्यताओं ने माता की पूजा की

ऐतिहासिक अध्ययन एक विज्ञान है जो ज्ञान, क्रमबद्धता, योजना, परीक्षण और वर्गीकरण का एक संग्रह है, और जो प्रमाणित किया जा सकता है । जब हम विगत इतिहास को पीछे देखते हैं, हम खोज कर सकते हैं कि प्राचीन संस्कृतियों में माता में लोगों का एक दृढ़ विश्वास था।

प्राचीन सभ्यताओं में माता को जीवन का स्रोत, सृष्टि का मूल, जीवों को जीवन देनेवाली और जीवन–संपन्नता माना गया। इसलिए प्राचीन काल में कसदी और अश्शूर, मिस्र, भारत, चीन, यूनान, रोम और अन्य प्राचीन देशों के लोगों ने भी विश्वास किया कि माता से प्रकृति और जीवन की शुरुआत हुई।

हम दक्षिण अमेरिका की प्राचीन सभ्यताओं में से इंका सभ्यता की मिसाल लें। इंका लोग “पाचा मामा” नामक देवी की पूजा करते थे। वे उसे “मामा पाचा ” या “पाचा मामा” कहकर बुलाते थे, जिसका मतलब धरती की माता था। लोग विश्वास करते थे कि वह जीवन का स्रोत है। फिर, वे क्यों माता को देवी की तरह पूजते थे? वे माता के द्वारा क्या पाना चाहते थे?

क्यों मानव जाति को माता की जरूरत है?

ऐतिहासिक और सामाजिक शोध के अनुसार, उन्होंने मानसिक स्थिरता की तलाश की। आध्यात्मिक स्थिरता मानसिक स्थिरता लाती है, और मानसिक स्थिरता शारीरिक स्थिरता लाती है, और शारीरिक स्थिरता सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विकास को सामने लाती है।

आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक स्थिरता सामाजिक विकास को सामने लाती हैं। ये सब चीजें मूल रूप से माता से आती हैं। मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से माता एक जीव है जिसकी पूरी मानव जाति अपनी सहज वृत्ति से खोज करती है।

दूसरे शब्दों में हम सब माता को ढूंढ़ने की एक सहज वृत्ति के साथ पैदा होते हैं। और हमेशा माता के प्यार और सुरक्षा में रहने की चाह रखना हमारी प्रवृत्ति में होता है। हमें माता के द्वारा प्रदान किए जाने वाले शारीरिक और आत्मिक भोजन की आवश्यकता है।

जैसे मैंने पहले कहा, बहुत सी प्राचीन सभ्यताओं ने शारीरिक और मानसिक स्थिरता पाने के लिए नारी के स्वरूप की देवियों की पूजा की जिन्होंने माता के रूप में उनकी इच्छाओं को संतुष्ट किया।

कैथोलिक चर्च की मरियम माता परमेश्वर नहीं है

वह कैथोलिक चर्च है जिसने मानव की इस मनोदशा का उपयोग करके एक देवी का आविष्कार किया। वे कुंवारी मरियम की प्रतिमा निर्मित करते हैं जो कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाती, और लोगों को उसकी पूजा कराते हैं। बाइबल की दृष्टिकोण से देखा जाए, तो मरियम सिर्फ एक स्त्री थी जिसे परमेश्वर के उद्धार के कार्य के लिए चुना गया था, लेकिन कैथोलिक चर्च ने मरियम को जो सिर्फ एक सृष्ट जीव था, देवत्व देकर इतना ऊंचा उठाया कि उसकी पूजा की जाए।

लोग सोचते हैं कि वे मरियम से ही प्यार, मानसिक स्थिरता, भावनात्मक शांति, आत्मिक भोजन और दया ढूंढ़ सकते हैं जिनकी मानवजाति को स्वाभाविक रूप से आवश्यकता है। इसी कारण वे मरियम को इस संसार में सबसे श्रेष्ठ मानते हैं और यहां तक कि वे सोचते हैं कि वह स्वर्ग में परमेश्वर से भी ऊंची है।

कुंवारी मरियम केवल परमेश्वर की एक रचना है। वह सृष्टिकर्ता से ऊंची नहीं हो सकती। उन लोगों के लिए भी जिन्हें विज्ञान पर भरोसा है, यह तो सर्वथा तर्कविरुद्ध है । इसलिए बहुत से वैज्ञानिक मरियम को माता परमेश्वर के रूप में स्वीकार नहीं करते। मरियम सिर्फ एक स्त्री थी जिसने भविष्यवाणी के अनुसार परमेश्वर के कार्य के एक भाग को पूरा किया। मरियम माता परमेश्वर नहीं है।

कुछ भी संयोग से नहीं होता। यदि समस्त घटनाओं के घटित होने का कारण है, तो किस कारण से लोग मरियम को पवित्र मानते हुए एक देवी की तरह पूजते हैं? इस दुनिया में हर एक चीज की शुरुआत और मूल है। यह जवाब खोजने के लिए, मैं आपको एक सवाल पूछना चाहता हूं। क्या माता परमेश्वर सचमुच मौजूद हैं?

माता परमेश्वर जिन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा गया

आइए हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसके बारे में बात करें। बहुत से वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर एक पिता है तो अवश्य एक माता भी होनी चाहिए। एक आदमी संतान के बिना एक पिता नहीं बन सकता, और अगर संतान है तो अवश्य ही एक माता होनी चाहिए। इसी कारण वैज्ञानिक जो सब कुछ तार्किक दृष्टि से देखने का प्रयास करते हैं, कहते हैं कि अगर एक पिता है तो अवश्य एक माता भी होनी चाहिए।

यदि हम प्रकृति पर गौर करें, सभी जीवित प्राणियों के पास अपनी माताएं हैं। मनुष्य, जानवर, मछली, पक्षी, और यहां तक कि पौधे भी अपनी माताओं के द्वारा जीवन पाते हैं। इसलिए वैज्ञानिक यह निष्कर्ष निकालते हैं कि पिता का अस्तित्व माता के अस्तित्व को प्रमाणित करता है। ऐसे वैज्ञानिक भी जो बड़े शक्की हैं, लैंगिक जनन से इनकार नहीं करते।

इसके अलावा, नर और नारी दैहिक, जैविक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं में एक दूसरे से अलग हैं। अब तंत्रिका-वैज्ञानिकों का कहना है कि पुरुषों और महिलाओं के बीच बड़ा अंतर है।

मिसाल के लिए, जब हम मानव मस्तिष्क को देखें, महिला का बायां और दायां मस्तिष्क एक दूसरे के निकट रहते हैं, लेकिन पुरुष का बायां और दायां मस्तिष्क एक दूसरे से थोड़े दूर हैं। इसी कारण मस्तिष्क के दोनों भागों को जोड़ने वाला महिला का महासंयोजिका पुरुषों के महासंयोजिका से ज्यादा अनुकूलनीय है। भले ही महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा एक किताब का सारांश करने की क्षमता कम होती है, लेकिन महिलाओं में घटनाओं का बारीकी से वर्णन करने की बेहतर क्षमता है। इसलिए महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा किसी चीज को जल्दी सीख लेती हैं।

कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि जब सब मनुष्य प्रलय के दिन का सामना करें तब महिलाएं पुरुषों से अधिक बच जाएंगी। यह एक अप्रमाणित परिणाम नहीं है। यह पूर्व निर्धारित की गई बात का एक हिस्सा है।

माता परमेश्वर जिन्हें बाइबल के दृष्टिकोण से देखा गया

उत्पत्ति 1:26–27 में परमेश्वर ने कहा, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार बनाएं… ”

फिर परमेश्वर ने कहा, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं… ”
उत्पत्ति 1:26

परमेश्वर को एकवचन ‘मैं’ के रूप में नहीं, पर बहुवचन ‘हम’ के रूप में वर्णित किया गया। यह स्पष्ट रूप से हमें बताता है कि माता परमेश्वर मौजूद हैं। प्रकाशितवाक्य 22:17 कहता है कि जो हमें जीवन का जल देते हैं, वे दो हैं, यानी पवित्र आत्मा और दुल्हिन।

आत्मा और दुल्हिन दोनों कहती हैं, “… जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले।”
प्रकाशितवाक्य 22:17

योजक शब्द “और” के द्वारा हम समझ सकते हैं कि केवल एक व्यक्ति ही नहीं है, बल्कि उसे छोड़कर एक और व्यक्ति भी है। इसका मतलब है कि केवल पिता परमेश्वर हमें जीवन का जल नहीं देते, बल्कि वह दुल्हिन के साथ प्रकट होकर हमें जीवन का जल देते हैं।

हमारे पिता और हमारी माता जिनकी बाइबल में गवाही दी गई

यीशु ने हमसे वादा किया कि वह अंत के दिनों में हमें जिला उठाएंगे और अनन्त जीवन देंगे। वह तो उन दिनों में ही तुरन्त जीवन का जल दे सकते थे, लेकिन उन्होंने अन्तिम समय के आने का इन्तजार किया। क्योंकि माता परमेश्वर जो पिता के साथ जीवन का जल देती हैं, अंत के दिनों में प्रकट होती हैं। प्रकाशितवाक्य 21:9–11 में मेम्ने की पत्नी के बारे में लिखा गया है।

“इधर आ, मैं तुझे दुल्हिन अर्थात् मेम्ने की पत्नी दिखाऊंगा।” … पवित्र नगर यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्वर के पास से उतरते दिखाया।
प्रकाशितवाक्य 21:9-10

गलातियों 4:26 ने कहा कि ऊपर की यरूशलेम है। ऊपर का मतलब स्वर्ग है, और लिखा गया कि वह हमारी माता हैं।

ऊपर की यरूशलेम स्वतंत्र है, और वह हमारी माता है।
गलातियों 4:26

मत्ती की पुस्तक के द्वारा हम जान सकते हैं कि यीशु दो हजार साल पहले पृथ्वी पर आए और सिखाया कि हमें परमेश्वर को पिता कहकर बुलाना चाहिए। इसी प्रकार बाइबल यह भी कहती है कि हमारे पास माता भी हैं।

“अत: तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो: ‘हे हमारे पिता, तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए।’ ”
मत्ती 6:9
ऊपर की यरूशलेम स्वतंत्र है, और वह हमारी माता है।
गलातियों 4:26

बाइबल निश्चित रूप से हमें कहती है कि हमारे पास पिता परमेश्वर के साथ–साथ माता परमेश्वर भी हैं। माता परमेश्वर पर विश्वसा करना यह मात्र एक संयोग नहीं है। स्वर्गीय माता वाकई में मौजूद हैं, हमेशा हमारे दिलों में रहती हैं, हमारी आत्मा की पूरी गहरी बातों को जानती हैं और हम पर राज करती हैं। वह हम में निवास करती हैं, और हमारी आत्माएं उन्हें पहचानती हैं।

माता परमेश्वर स्वयं उद्धार के प्रबंधन को पूरा करने के लिए बाइबल की भविष्यवाणी के अनुसार शरीर में आई हैं और आज इन अंतिम दिनों में हमें जीवन का जल दे रही हैं।

स्वर्गीय माता, आपका धन्यवाद!

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