जोर्हे माझा

माता, उद्धार के प्रबंधन के लिए मूल कुंजी

हमारा लक्ष्य और हमारी समस्या यह है कि हमें अपनी आत्माओं के उद्धार के
लिए हर मुमकिन प्रयास करना चाहिए, क्योंकि हम में जीवन नहीं है। अब,
हमें समाधान मिल गया है।
हमारी आत्माओं के उद्धार की मूल कुंजी क्या है?

अंतर्राष्ट्रीय बाइबल सेमिनार, दक्षिण अमेरिका - डबल्यू एम सी प्रधान कार्यालय का अंतर्राष्ट्रीय सभाकक्ष

जोर्हे माझा

पेरू

बिज़्नस प्रबंधन में मास्टर
पेरू के वायुसेना अकादमी का
पूर्व प्रधानाचार्य

सफल व्यापार प्रबंधन के लिए दिखाई देने वाली चीज के अलावा दिखाई न देने वाली चीज को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उसी तरह से अपनी आत्माओं के उद्धार के सफल प्रबंधन के लिए हमें दिखाई देने वाली चीज के अलावा युगों से छुपे हुए गुप्त रहस्य को जानना चाहिए। बाइबल बताती है कि वह गुप्त रहस्य स्वर्गीय माता हैं, और स्पष्ट रूप से दिखाती है कि जब हम स्वर्गीय माता को ग्रहण करें तो हम उद्धार तक पहुंच सकते हैं।

सफल व्यापार प्रबंधन के सिद्धांत

व्यवसाय प्रबंधन विज्ञान उन ज्ञानों का समूह है जिनमें उन सामान्य अध्ययनों को जो सफलता प्राप्त करने के लिए काम आते हैं, क्रमिक और व्यवस्थित किया गया है। इसलिए व्यवसाय प्रबंधक सफलता हासिल करने के लिए और अधिक प्रभावी व कुशल योजनाओं को स्थापित करके इसे पूरा करने की कोशिश करते हैं। प्रबंधन की योजना कंपनी की स्थापना के उद्देश्यों के मुताबिक भिन्न-भिन्न हो सकती है, और प्रबंधन के लक्ष्यों के अनुसार सफलता के नियम बनाए जाते हैं।

एक कंपनी को सफल होने के लिए सबसे पहले कंपनी की समस्याओं से पूरी तरह अवगत होना चाहिए और उन्हें सुलझाने के लायक समझना चाहिए। समस्याओं को हल करने के लिए निम्न तीन चीजों की आवश्यकता है। पहला, कंपनी का एक लक्ष्य होना जरूरी है। दूसरा, कंपनी को बाधाओं के प्रति जागरूक होना चाहिए। तीसरा, कंपनी को समस्याओं को हल करने की इच्छा होनी चाहिए।

इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रखते हुए एक कंपनी अपनी समस्याओं को हल कर सकती है। लेकिन उसे दो प्रकार के कारकों का एहसास करने की आवश्यकता है: एक तो सामान्य और दृश्य कारक है जो आसपास के परिवेश में पाया जा सकता है, और दूसरा अदृश्य और गुप्त कारक है।

प्रबंधन में सफलता और असफलता

आमतौर पर एक व्यवसाय चलाने में केवल दृश्य कारकों और गलतियों पर विचार करते हुए निर्णय करने के कारण गलती हो जाती है। लेकिन समस्याओं को सही ढंग से हल करने के लिए कंपनी को छिपे कारकों और गलतियों को समझने के लिए हर संभव प्रयास करने की जरूरत है।

इसका मतलब है कि एक कंपनी को अंतिम उपभोक्ता, यानी ग्राहकों के स्वाद और इच्छाओं का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। यदि वह ऐसा प्रयास न करे और ग्राहकों की रुचि को समझे बिना उत्पादों को पेश करे, तो ग्राहक असंतुष्ट होंगे।

यदि कंपनी उत्पादों को ग्राहकों की रुचि के अनुकूल बनाने के लिए सारा प्रयास लगाए और ग्राहकों को संतुष्ट करे, तो यही सफल प्रबंधन है, और हम उसे जो ऐसा करता है, एक महान प्रबंधक कह सकते हैं।

हमारे उद्धार के लिए विश्वास का प्रबंधन

बाइबल हमें बताती है कि एक महान प्रबंधक है जो हमारे विश्वास के जीवन को सफल बनाता है, यानी जो हमारी आत्माओं के उद्धार का प्रबंधन करता है।

जिसका मैं परमेश्वर के उस प्रबन्ध के अनुसार सेवक बना जो तुम्हारे लिये मुझे सौंपा गया, ताकि मैं परमेश्वर के वचन को पूरा पूरा प्रचार करूं।
कुलुस्सियों 1:25

परमेश्वर स्वयं हमारी आत्माओं के उद्धार का प्रबंधन करते हैं और इसके लिए अपने कार्यकर्ताओं का यंत्रों के रूप में इस्तेमाल करते हैं। परमेश्वर के कार्यकर्ता सबसे पहले यह जानते हैं कि परमेश्वर हमारे उद्धार के प्रबंधक हैं, और वे मसीह की व्यवस्था, यानी नई वाचा के माध्यम से उद्धार का समाचार पहुंचाते हैं। उन्हें तीव्रता से महसूस होना चाहिए कि सारी मनुष्य जाति समस्याओं का सामना कर रही है, और उन्हें उन समस्याओं को हल करने के लिए जाना-पहचाना कारक और अज्ञात कारक दोनों को ढूंढ़ना चाहिए।

इसके अतिरिक्त उन्हें बाधाएं क्या हैं, इसे पहचानना चाहिए। परमेश्वर को न जानना ही एक बड़ी बाधा है। अवश्य ही आत्माओं का उद्धार ही उनका लक्ष्य होना चाहिए, और उनमें उन आत्मिक समस्याओं को जिनका मानवजाति सामना कर रही है, हल करने की दृढ़ इच्छा होनी चाहिए। ऐसी इच्छा लोगों को उस पश्चाताप की ओर ले जाती है जो उद्धार पाने और परमेश्वर को जानने के लिए आवश्यक है। जब परमेश्वर के कार्यकर्ता इन सिद्धान्तों को जानें और इससे सचेत रहें कि मानवजाति समस्याओं से घिरी है, तब समस्याएं हल हो सकती हैं।

जब हम बाइबल में गुप्त हुए रहस्य को जानें तो आत्माओं के उद्धार का प्रबंधन सफल हो सकेगा

जब हम जो परमेश्वर के कार्यकर्ता हैं, सचेत रहते हैं कि समस्याएं हैं और वे समस्याएं हल हो सकती हैं, तब हमें छिपे हुए रहस्यों को ढूंढ़ना चाहिए। यदि हम इन छिपे हुए रहस्यों को न जानें, तो हमारी आत्माओं के उद्धार का प्रबंधन असफल हो जाएगा।

ये सब बातें यीशु ने दृष्टान्तों में लोगों से कहीं, और बिना दृष्टान्त वह उनसे कुछ न कहता था… “मैं उन बातों को जो जगत की उत्पत्ति से गुप्त रही हैं प्रगट करूंगा।”
मत्ती 13:34–35

किताब जो संसार की सृष्टि के बारे में अभिलेख करती है, उत्पत्ति की किताब है। इसलिए उत्पत्ति की किताब के द्वारा ही हम असली समस्या को जानने के लिए और हमारी आत्माओं के उद्धार का उपाय जानने के लिए गुप्त रहस्यों को ढूंढ़ सकते हैं।

उत्पत्ति की किताब में गुप्त हुआ आत्माओं के उद्धार का रहस्य

फिर परमेश्वर ने कहा, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं… ”
उत्पत्ति 1:26

आमतौर पर, ईसाई कहते हैं कि स्वर्ग के प्रभु परमेश्वर केवल एक ही हैं। वे अज्ञात और अदृश्य चीजों से अनजान होते हुए सिर्फ अपने ज्ञान और दृश्य वस्तुओं पर निर्भर होकर ऐसे बहुत ही अहम प्रश्न का लापरवाही से जवाब देते हैं। लेकिन बाइबल हमें बतलाती है कि उसमें युगों से गुप्त रखा गया कुछ रहस्य है। उत्पत्ति 1:26 में दर्ज किए गए “हम” शब्द से ही उस रहस्य को सुलझाया जा सकता है।

… “हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं…”
उत्पत्ति 1:26

अगली आयत कहती है, “परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया।”

तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया; नर और नारी करके उसने मनुष्यों की सृष्टि की।
उत्पत्ति 1:27

जब परमेश्वर ने अपने स्वरूप के अनुसार मनुष्य को रचा, तब नर और नारी को रचा गया। इसलिए परमेश्वर में नर का स्वरूप और नारी का स्वरूप है न? यही वह गुप्त रहस्य है जिसे बहुत से बाइबल के विद्वान भी अब तक नहीं सुलझा सके।

मानवजाति केवल नर स्वरूप के परमेश्वर को जानती है और उन्हें पिता परमेश्वर कहकर पुकारती है। तब नारी स्वरूप की परमेश्वर को हमें क्या कहकर पुकारना चाहिए? हमें उन्हें “माता परमेश्वर” कहकर पुकारना चाहिए।

माता परमेश्वर के अस्तित्व को जानने के द्वारा ही हमने मानव जाति की समस्याओं के बारे में 100 प्रतिशत ज्ञान प्राप्त किया है। हमें अपने 50 प्रतिशत ज्ञान को, यानी सिर्फ पिता परमेश्वर को, जो सब को ज्ञात है, ध्यान में रखकर जल्दबाजी में निर्णय नहीं करना चाहिए, बल्कि युगों से गुप्त रही माता परमेश्वर के अस्तित्व को भी, जो बाकी 50 प्रतिशत ज्ञान है, ध्यान में लेते हुए पूर्ण निर्णय करना चाहिए। हम समस्या के 100 प्रतिशत ज्ञान के साथ ही समस्या के समाधान की अंतिम मंजिल तक पहुंच सकते हैं।

माता परमेश्वर जिनकी बाइबल गवाही देती है

इब्रानी भाषा की बाइबल में “एलोहीम” शब्द 2,500 से भी ज्यादा बार प्रकट हुआ है। “एलोहीम” एकवचन “एल” या “एलोहा” का बहुवचन है, जिसका अर्थ परमेश्वर हैं, इसलिए एक से ज्यादा परमेश्वर होने चाहिए। जैसे कि हमने पढ़ा है, एलोहीम परमेश्वर पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर हैं।

एलोहीम = परमेश्वर + परमेश्वर

आइए हम इसका समर्थन करने के लिए बाइबल में और अधिक आयतों को देखें। प्रकाशितवाक्य 19:7 में मेमने की पत्नी एक रहस्य बनी रहती है, इसलिए ज्यादातर चर्च अब तक मेमने की पत्नी को चर्च कहते हैं। क्या यह सही है?

आओ, हम आनन्दित और मगन हों, और उसकी स्तुति करें, क्योंकि मेम्ने का विवाह आ पहुंचा है, और उसकी दुल्हिन ने अपने आप को तैयार कर लिया है।
प्रकाशितवाक्य 19:7

यहां हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि तीन प्रकार के सदस्य हैं। पहला, उन लोगों का समूह है जो आनन्दित और मगन रहते हैं, दूसरा मेमना है और तीसरा मेमने की दुल्हिन है। चूंकि जो आनन्दित और मगन रहते हैं, वे संत(चर्च) हैं, इसलिए वे मेमने की दुल्हिन नहीं हो सकते। तब मेमने की दुल्हिन कौन है?

“इधर आ, मैं तुझे दुल्हिन अर्थात् मेम्ने की पत्नी दिखाऊंगा।” … पवित्र नगर यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्वर के पास से उतरते दिखाया।
प्रकाशितवाक्य 21:9-10

रकाशितवाक्य 21:9-10 में मेमने की दुल्हिन को यरूशलेम नामक पवित्र नगर के रूप में व्यक्त किया गया है। प्रेरित पौलुस ने जो तीसरे स्वर्ग तक उठा लिया गया था, निडरता, साहस और दृढ़ विश्वास से गवाही दी कि पवित्र नगर यरूशलेम जो स्वर्ग से नीचे उतरती है, हमारी माता हैं।

ऊपर की यरूशलेम स्वतंत्र है, और वह हमारी माता है।
गलातियों 4:26

माता परमेश्वर अंतिम दिनों में पवित्र आत्मा, यानी पिता परमेश्वर के साथ जो मेमना हैं, हमें जीवन का जल देने के लिए इस पृथ्वी पर आई हैं।

आत्मा और दुल्हिन दोनों कहती हैं, “… जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले।”
प्रकाशितवाक्य 22:17

जो कोई अपनी आत्मा का उद्धार पाना चाहता है, उसे अवश्य ही पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर से मिलना चाहिए जो हमारी आत्माओं के प्रबंधक हैं।

माता, उद्धार के प्रबंधन के लिए मूल कुंजी

जैसे कि हमने पढ़ा है, हमारी आत्माओं के उद्धार की मूल कुंजी माता परमेश्वर ही हैं। यदि हम माता परमेश्वर को महसूस करें और जानें, तब हम उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य तक बाइबल में सभी छिपे रहस्यों को सुलझा सकते हैं।

सारे रहस्य प्रकट किए जा चुके हैं, और अब हम अपनी आत्माओं की स्थिति को समझ पाए हैं, और हमने मूल कुंजी भी खोज ली है जो हमारी आत्माओं की सभी समस्याओं को हल करेगी। उस बड़ी समस्या को जिसका मानव जाति आत्मिक रूप से सामना कर रही है, हल करने के लिए उन्हें स्वर्गीय माता से मिलना चाहिए।

परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त करने के लिए यत्न करें

एक कंपनी के सफल प्रबंधन के लिए सभी कर्मचारी यह जानने के लिए यत्न करते हैं कि ग्राहक क्या सोचता है, क्या एहसास करता है और क्या पसंद करता है, और वे ग्राहक को संतुष्ट करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। उसी प्रकार हमें अपनी आत्माओं का उद्धार पाने के लिए परमेश्वर को महसूस करने के लिए और उनका ज्ञान प्राप्त करने के लिए पूरा यत्न करना चाहिए।

होशे की किताब कहती है कि हम नष्ट किए जाएंगे यदि हम परमेश्वर को न जानते हों। इसलिए हमें परमेश्वर को जानने का प्रयास करना चाहिए। हमें पिता परमेश्वर और माता परमेश्वर दोनों को जानना है जो युगों से छुपा हुआ गुप्त रहस्य है। हमें अपनी आत्मा का उद्धार पाने में सफल होने के लिए निश्यच ही स्वर्गीय माता को जानना चाहिए।

पूरी मानवजाति को उस चर्च में आना चाहिए जहां वे अपनी आत्माओं के उद्धार के लिए स्वर्गीय माता से मिल सकती है। दुनिया में कौन सा चर्च स्वर्गीय माता पर विश्वास करता है? वह केवल चर्च ऑफ गॉड है।

इसलिए, आपको चर्च ऑफ गॉड में आने की आवश्यकता है और न केवल पिता परमेश्वर का, बल्कि माता परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त करने के लिए यत्न करना चाहिए जो पीढ़ियों और युगों से गुप्त रहस्य हैं, ताकि आप अपनी आत्माओं का उद्धार पा सकें।

धन्यवाद!

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